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पितृपक्ष में पितरों के पुनीत कार्यों को जीवन में आत्मसात करना

पितृपक्ष में पितरों के पुनीत कार्यों को जीवन में आत्मसात करना

संवाददाता/सत्या न्यूज इंडिया, आज पितृपक्ष की इस पुण्य बेला में हमलोगों को अपने पूर्वजों/पितरों के पुनीत कार्यों एवं कर्तव्यनिष्ठा के विषय मे अपने बच्चों एवं नौनिहालों के बीच चर्चा करना चाहिए |जिससे परिवार, पड़ोस, समाज एवं राष्ट्र मे एक अच्छा संदेश पहुंचे |और एक स्वस्थ्य  एवं सभ्य समाज का निर्माण किया जा सके |क्योंकि आज आधुनिकता की इस भागदौड़ में हम कहीं न कहीं संसाधनों को संजोने में अपनों को एवं अपनी सुख शान्ति के उस पल भूलते जा रहे हैं |जिसकी छाया में सुकून के दो पल व्यतित करने के लिए हम सब कुछ दाव पर लगा बैठे हैं | क्या पूर्वजों की उज्जवल कीर्ति एवं उनके पुनीत कार्यों की चर्चा से हमारे-आपके बच्चों/नौनिहालों को प्रेरणा मिल सकती है |जिसे देखकर हमें अपने महापुरुषों सुभाष चंद्र बोस, चंद्र शेखर आजाद, डॉ. A.P.J.अब्दुल कलाम आदि महापुरुषों कि स्मृतियाँ झंकृत हो उठे, किसे पता है कि ये नौनिहाल/बच्चे आगे चलकर किस महापुरुष की पदचिन्हों पर चलकर हमारे-आपके गांव, समाज, राष्ट्र का नाम रोशन करें |इसलिए हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति पर आधारित विषयों पर सामुहिक चर्चाओं में खुलकर बात करना चाहिए |

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