- संवाददाता/सत्या न्यूज इंडिया ,आज पितृपक्ष की इस पुनीत बेला में हमलोगों को अपने पूर्वजों के आदर्शों और कर्तव्यों की पुनीत राह पर चलने की शिक्षा लेनी चाहिए।और अपने आने वाली पीढ़ियों में सभ्यता, संस्कृति, संस्कार आदि को बनाए रखने के लिए हमें प्रयास करते रहना चाहिए।जिससे परिवार, पडोस, समाज, और देश में उदाहरण के रूप मे एक अच्छा सन्देश दिया जा सके।क्या आज आधुनिकता की इस बेला अपने पूर्वजों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से कर्तव्यों और आदर्शों को पुनः जागृत कर आने वाली पीढ़ी को कुछ प्रेरणा दिया जा सकता है या नही, क्या हमलोग अपनी जिम्मेदारियों को अनदेखा कर अपने कर्तव्योका निर्वहन करने में लापरवाही नही कर रहे है, जिसका परिणाम हमलोगों को समय-समय पर समाज में देखने को मिलता रहता है इसलिए परिवार, समाज, देश मे एक अच्छा सन्देश पहुँचाने के हमलोगों को अपनी सभ्यता, संस्कृति, संस्कार आदि को बनाए रखना चाहिए जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी को भी अच्छे राह पर चलने की प्रेरणा मिलती रहे।
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